अभिव्यक्ति मेरी
शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

अन्दाज-ए-वफा सूरत से, हरगिज़ न लगाया जाये।

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जिंदा लोगों को ,न फिर से, लाशों मे सुमारा जाये। ऐ खुदा खैर करो ,  वो लम्हा  न  दुवारा आये।। जलाए है आशियाने , दो पल के उजाले ने, ...
मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।

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जो इंसानियत को मारे, घर-घर लहू बहाये। वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।। ये आतिश नवा से लोग ही, मातम फ़रोश ...
गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

गहरे काले अक्षरों से

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आओ चलकर देखते है, क्या लिखा है  हमारे भाग्य में उन बड़े -बड़े कमरों में अपने अनुक्रमांक पर बैठकर उन सफेद पीले पन्नों में गहरे काले ...
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

चाँद के उजाले में, आँसू के गीत लिखता है ।

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हर तावनाक चेहरा, कालिख छिपाये रखता है । अन्दर से और कुछ है, बाहर से और दिखता है । पसीने की तो दोस्तो, तुम बात छोड़ दीजिए, खून भी इस श...
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

अब खून भी बहता नहीं, और जख्म भी बढते गये ।

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वक्त का हर  ज़िक्र मैं, लिखता चला गया । हर रंज-ओ-ग़म  को आप ही, सहता चला गया ।। इस रास्ते के दरम्यां, शायद कहीं पर छाँव हो, 'मोहन ...
मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

धुँधली होती तस्वीर

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रेगिस्तान  के किसी कोने में  बनाया हुआ है मैंने अपना एक छोटा सा घर जिसमें चारो ओर  खिड़कियाँ और दरवाजे ही हैं। उस घर में लगा  रखी है ए...
शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

सजायाफ्ता है हम भी, सफ्फाक उस नजर के ।

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बस चल रही है जिंदगी, उस रब के नाम पर । उम्मीद है सुबह की,  भरोसा  है  शाम  पर ।। घर की दर-ओ-दीवार पर, ये मेहरबां है आसमां, कोई छत नहीं ...
सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

ये अस्मिता की बात करते है, वो अस्मत को लुटाने बाले (गज़ल)

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जख्मों को देखता हूं तो, इतिहास नजर आता है। हर आस्तीन में छिपा , एक साँप नजर आता है। महलों में रोशनी है, गलियों  में  बस अंधेरा, इंसाफ इस...
शनिवार, 30 जनवरी 2016

गज़ल , गीत, कविता कुछ भी समझें

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मेरे दोस्त बिल्कुल भी, गद्दार नहीं है। पर ये बात भी सही है, बफ़ादार नहीं है।। हमको तो खुद ही चलना है, तारीक़ राह पर, इन बस्तियों में मेरे...
गुरुवार, 28 जनवरी 2016

शायद मुझसे कुछ कहतीं है।

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मुझे लगता है मैं पागल हूँ शायद विक्षिप्त , या घायल हूँ । क्योंकि मैं बातें करता हूँ, चट्टानों से, पतझड़ से, निर्जन से, रेगिस्तानों ...
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बुधवार, 27 जनवरी 2016

दोस्ती जैसा कोई, रिश्ता नहीं होता

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                दोस्ती स्वर्ण के जैसा कभी, जस्ता नहीं होता । दोस्त के जैसा कोई , फरिश्ता  नहीं होता ।। वैसे तो सारे विश्व में , रिश्ते ह...
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मंगलवार, 26 जनवरी 2016

मैं आग को पीता गया बस आजमाने के लिये

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खुद की मौत पर तन्हा था मैं, मांतम मनाने के लिये। केवल  होंठ ही हिलते है, अब बस गुनगुनाने के लिये।। हालांकि मेरे हाथ से, गिर कर जो टूटा का...
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सोमवार, 25 जनवरी 2016

सफल आदमी का हर बदनाम, बदल जाता है।

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  गीत  या  गज़ल  या  कविता कुछ भी समझ लो आदमी नहीं बदलता, बस लिबास बदल जाता है। दोस्त नहीं बदलते, विश्वास बदल जाता है।। अमीरी और गरीबी...
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शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

वो गमज़दा एहसास ही अब, सायराना हो गया है।

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देखते ही देखते ,मंजर पुराना हो गया है। बंदिशों का इक तरीका , आशियाना हो गया है। मसरूफ़ियत इतनी बढ़ी है, जिन्दगी के दरम्यां, रूबरू खुद से ...
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