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सोमवार, 27 दिसंबर 2021

हमने भी करके देख लिया, ये इश्क गुलाबों वाला

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वो मातमी मंजर था ,जलती सी चिताओं वाला । अश्कों की बारिशों में, चुभती सी हवाओं वाला । फिर बेचैनियों के दरमियां,मौसम की खबर आई अब अर्थ खो चुका...
14 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 4 जून 2016

कई बेगुनाह खून , चिरागों का हो गया।

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वो दूर जाके चाँद, सितारों सा हो गया। मैं काँच सा टूटा तो, हजारों सा हो गया। हालांकि दरम्यां में बहुत, फासला न था, दरिया सी जिंदगी के, क...
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