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सोमवार, 27 दिसंबर 2021

हमने भी करके देख लिया, ये इश्क गुलाबों वाला

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वो मातमी मंजर था ,जलती सी चिताओं वाला । अश्कों की बारिशों में, चुभती सी हवाओं वाला । फिर बेचैनियों के दरमियां,मौसम की खबर आई अब अर्थ खो चुका...
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