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सोमवार, 21 मार्च 2016

मिरे खेतों को पानी का ,भरोसा दे गया बादल,

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वो नंगे पांव कांटों पर ,मेरा हँसकर गुजर जाना। राह में ठोकरें खाकर के ,गिरना और सम्हल जाना। मेरी आँखों से कागज पर,महज टपका था इक आँसू, ...
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