अभिव्यक्ति मेरी
शराबों लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शराबों लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 4 जून 2016

कई बेगुनाह खून , चिरागों का हो गया।

›
वो दूर जाके चाँद, सितारों सा हो गया। मैं काँच सा टूटा तो, हजारों सा हो गया। हालांकि दरम्यां में बहुत, फासला न था, दरिया सी जिंदगी के, क...
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

अभिव्यक्ति मेरी
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.