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मंगलवार, 28 जून 2016
किसी जिंदगी का दीपक, बुझाना नही कभी।
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दबे दर्द से पर्दा , उठाना नहीं कभी। जख्मों को इस तरह से, दुःखाना नहीं कभी। कोई आँसू तेरे लिए , सजा न बन जाए , 'मोहन' को इस...
शनिवार, 4 जून 2016
कई बेगुनाह खून , चिरागों का हो गया।
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वो दूर जाके चाँद, सितारों सा हो गया। मैं काँच सा टूटा तो, हजारों सा हो गया। हालांकि दरम्यां में बहुत, फासला न था, दरिया सी जिंदगी के, क...
सोमवार, 30 मई 2016
कब तक करें भरोसा, परवरदिगार का।
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किये ही दे रही है, मेरे घर को आग खा़क, कब तक करें भरोसा, परवरदिगार का। दिवाली के हर दिये में, उदासी की झलक है, खत्म हो रहा है वक्त, उनक...
गुरुवार, 28 अप्रैल 2016
बन्द कमरे में अकेला, और मैं करता भी क्या,
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दोस्तों के इस जहां में,दोस्ती ढूँढें कहाँ, दोस्त जैसे है बहुत , पर दोस्त भी मिलता नहीं। कारवां से दूर हो ,तन्हा रहा मैं इन दिनों, वक्त ...
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