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गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

तकब्बुर है शहर वालों को,खुद के शऊर पर (गज़ल)

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माना कि तेरे शहर का,मौसम नया तो है। मयस्सर हमारे गाँव में ,ताजा हवा जो है। तकब्बुर है शहर वालों को,खुद के शऊर पर, मुतमईन हूँ म...
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