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शनिवार, 21 मई 2016

नज़रों का धोखा था वो, सादिक वफा नहीं थी,

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शिद्दत से उसको ढूँढा, भटका हूँ हर जगह पर,  लेकिन न वो मिला,  मुझे जिसकी तलाश है। चल-चल के रहगुजर में, जूते घिसे और पैर भी, मंजिल के...
गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

बन्द कमरे में अकेला, और मैं करता भी क्या,

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दोस्तों के इस जहां में,दोस्ती ढूँढें कहाँ, दोस्त जैसे है बहुत , पर दोस्त भी मिलता नहीं। कारवां से दूर हो ,तन्हा रहा मैं इन दिनों, वक्त ...
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