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शनिवार, 4 जून 2016
कई बेगुनाह खून , चिरागों का हो गया।
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वो दूर जाके चाँद, सितारों सा हो गया। मैं काँच सा टूटा तो, हजारों सा हो गया। हालांकि दरम्यां में बहुत, फासला न था, दरिया सी जिंदगी के, क...
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